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Showing posts from October, 2020

प्रेम तलब की बगावत।

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*प्रेम-तलब की बगावत* तिलक लगाए बेखौफ मन, तोड़ बैठा रुढिता की बेडियां.. निकाब से झांकती...काजल में परिबंधित नयनों के दीदार में.. फिर एक दिन भिड़ गए जब वो नैना.. सड़क किनारे की एक आशिक की मजार में., वक्त यूं थम गया.. कि मानो कर्फ्यू लग गया हो दिल के बाजार में, खबर फैली.. अफवाहें बहने लगी., कि घायल हो गया एक निहत्था.. हथियारबद्ध हुस्न के अत्याचार में, खूब भड़के दंगे.. खूब ही टकराई तलवारें., और अंत में हार..अब्बू के भय को भुला.. वो कजरारे नयन भी डूब बैठे प्यार में खैर ज्यादा दिन न चला दौर ये छुपके मुलाकातों वाला.. बहती अफवाहों ने रुख कर शहर की ओर.. प्रेम महल फूंक डाला.. सहा..सहा.. और सहा.. पर फिर आपा हार ही गया प्रेम-तलब के आगे., बगावत हुई.. पंछी पिंजरा तोड़ आजाद हुए, पर इस बगावत ने लोगों की की बातों में आ... मौत का फतवा जारी करा दिया मोहल्ले के हर परिवार में कुछ दूर तो उड़ान भरी उन प्रेम पंछियों ने.. और फिर अचानक एक दिन, लाशें टंगी मिली दोनों की बीच बाजार में.. कुछ दिन खौफ में रहा माहौल.. पर.. फिर टकरा गए दो नैना.. किसी नए आशिक की मजार में।।🤤

अब और स्वीकार नहीं मुझे मेरे धर्म का अपमान,अब आवाजें उठेंगी।

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एक फैशन बन गया है आजकल, महिला सशक्तिकरण की बातों के नाम पर धर्म को निशाना बनाने का,उस धर्म को निशाना बनाने का जहां महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है,जिस धर्म की हर पौराणिक गाथाओं में स्त्री सम्मान को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है,जहां मनुष्य तो मनुष्य, पशु पक्षियों तक ने स्त्री सम्मान में अपने प्राण त्याग दिए.. जटायु,जिन्होंने जब तक शरीर में शक्ति रही मां सीता के लिए लड़ाई जारी रखी और जब रावण के आगे हार गए तो मौत तक से भी हठ ले ली, स्वीकार नहीं किया मौत को तब तक जब तक श्री राम को माता सीता का हाल न सुना दिया, तो हाथ जोड़कर विनती है आपको नास्तिक रहना है रहे, हमें आपकी नास्तिकता से कोई आपत्ती नही किंतु यदी हमारी आस्था हमारे धर्म का मज़ाक बनाया गया तो अब हम चुप नहीं बैठेंगे ..!! हम भी महिलाओं को बराबर दर्जा दिलाने की इस लड़ाई में आपके साथ है यदी आप इस लड़ाई में अपने मुद्दों से हटकर किसी भी धर्म को निशाना न बनाएं तो। जय श्री राम।🙏🚩

महिषासुरमर्दिनी।

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वक्त ने निर्भरता सिखा दी शायद, अन्यथा शास्त्रों में तो महिषासुरमर्दिनी कहा गया है तुम्हें।

नवरात्रि २०२०

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  नवरात्र शुरू होते ही कुछ बुद्धिजीवियों का विलाप शुरू हो जाता है, कि "सारे वर्ष तो महिलाओं पर अत्याचार और नौ दिन पूजा" कृपया इस प्रकार की कोई पोस्ट शेयर न करें,इस से समाज में गलत संदेश जाता है कि मात्र एक हिन्दू धर्म में ही महिलाओं पर अत्याचार होता है,या जो नवरात्रों में पूजा करते है वही यह सब करते है। किसी और धर्म में महिलाओं को पूजनीय नहीं माना गया, किंतु हमारे हिंदू धर्म में महिलाओं और पुरुषों को बराबर दर्जा दिया गया है,इस पर गर्व महसूस करें एवं खूब हर्षोल्लास के साथ नवरात्रि का पर्व मनाए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। जय माता दी।🙏🏻🚩

बेटी होना ज़रूरी है घर में।

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ज़रूरी है घर में लड़की का होना, हर त्योहार मैंने मां की खुशियों में एक बेटी की कमी सी देखी है, जिन बेटों को रोता है जमाना, वही तीन तीन होते हुए भी मैंने उनकी पलकों पर नमी सी देखी है !!

The bag thief (Part-1)

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  "Just another day in this mundane life", I thought to myself, as I was leaving home that day, never imagining what surprises lay ahead of me.  I reached the metro station and was going through the security checks, kept my bag inside the scanner and walked to the other side. Picking up my bag, I went on towards the platform, completely oblivious of the fact that  another bag had gotten entangled with it. I, with my earphones tucked in, playing the saddest songs Arijit had ever sung, was walking lost in my thoughts and the bag, was mercilessly being dragged along gathering all the dust it could find,. Suddenly I felt a tap on my shoulder and what I saw when I turned, was something that I  couldn't possibly  have imagined. Standing in front of me  was a girl or rather an Angel if I would describe it that way.  She had an off-whitish Hijab over her head with tiny flowers of a light pink colour on them. They look so fragile, so delicate as if just touchin...