प्रेम तलब की बगावत।
*प्रेम-तलब की बगावत* तिलक लगाए बेखौफ मन, तोड़ बैठा रुढिता की बेडियां.. निकाब से झांकती...काजल में परिबंधित नयनों के दीदार में.. फिर एक दिन भिड़ गए जब वो नैना.. सड़क किनारे की एक आशिक की मजार में., वक्त यूं थम गया.. कि मानो कर्फ्यू लग गया हो दिल के बाजार में, खबर फैली.. अफवाहें बहने लगी., कि घायल हो गया एक निहत्था.. हथियारबद्ध हुस्न के अत्याचार में, खूब भड़के दंगे.. खूब ही टकराई तलवारें., और अंत में हार..अब्बू के भय को भुला.. वो कजरारे नयन भी डूब बैठे प्यार में खैर ज्यादा दिन न चला दौर ये छुपके मुलाकातों वाला.. बहती अफवाहों ने रुख कर शहर की ओर.. प्रेम महल फूंक डाला.. सहा..सहा.. और सहा.. पर फिर आपा हार ही गया प्रेम-तलब के आगे., बगावत हुई.. पंछी पिंजरा तोड़ आजाद हुए, पर इस बगावत ने लोगों की की बातों में आ... मौत का फतवा जारी करा दिया मोहल्ले के हर परिवार में कुछ दूर तो उड़ान भरी उन प्रेम पंछियों ने.. और फिर अचानक एक दिन, लाशें टंगी मिली दोनों की बीच बाजार में.. कुछ दिन खौफ में रहा माहौल.. पर.. फिर टकरा गए दो नैना.. किसी नए आशिक की मजार में।।🤤