ख़ुदग़रज़ी !! ~एक मोहब्बत ऐसी भी ..
अक्सर एक रिश्ता टूटने के बाद दो तरह के लोग बचते है, एक जो छोड़कर जाते है और दूसरे जिन्हें छोड़ा जाता है.. अब यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि छोड़कर जाने वाले लोग शायद एक नियमित वक्त से पहले रिश्ते को, यादों को भुला देते है और जिन्हें छोड़ा जाता है वो वहीं खड़े रह जाते हैं सालों साल जहां रिश्ता टूटता है, ऐसा नहीं कोशिशें नहीं करते हम उस दल-दल से बाहर आने की, लेकिन जितनी कोशिशें करते है जितने हाथ पैर मारते है उतने ही और धंसते चले जाते है, खुद को कोसते हैं वक्त,किस्मत को कोसते है जाने वाले को गलत ठहराते है पर फायदा जरा भी नहीं मिलता, यादें उतनी ही और परेशान करती है,ऐसे में कुछ जरा कमजोर लोग हार मान अपने स्वाभिमान का बड़ी ही बेरहमी से कत्ल कर गिड़गिड़ाने वापस पहुंच जाते है, और कुछ दोस्तों या परिवार का हाथ मिलने पकड़कर बाहर निकल आते है.. फिर शुरू होता है दौर मुफ्त की सलाहों का, "अरे वो इंसान ही गलत था,तू भरोसा रख तुझे उस से बेहतर मिलेगी/मिलेगा !" "भाई/बहन तेरी मोहब्बत तो सच्ची थी,बस गलत इंसान से की, इंतजार कर तुझे बो सही इंसान जरूर मिलेगा" .. हर कोई यही सिखाता है कि...
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