ख़ुदग़रज़ी !! ~एक मोहब्बत ऐसी भी ..




 अक्सर एक रिश्ता टूटने के बाद दो तरह के लोग बचते है, एक जो छोड़कर जाते है और दूसरे जिन्हें छोड़ा जाता है..

अब यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि छोड़कर जाने वाले लोग शायद एक नियमित वक्त से पहले रिश्ते को, यादों को भुला देते है और जिन्हें छोड़ा जाता है वो वहीं खड़े रह जाते हैं सालों साल जहां रिश्ता टूटता है,

ऐसा नहीं कोशिशें नहीं करते हम उस दल-दल से बाहर आने की, लेकिन जितनी कोशिशें करते है जितने हाथ पैर मारते है उतने ही और धंसते चले जाते है, खुद को कोसते हैं वक्त,किस्मत को कोसते है जाने वाले को गलत ठहराते है पर फायदा जरा भी नहीं मिलता, यादें उतनी ही और परेशान करती है,ऐसे में कुछ जरा कमजोर लोग हार मान अपने स्वाभिमान का बड़ी ही बेरहमी से कत्ल कर गिड़गिड़ाने वापस पहुंच जाते है, और कुछ दोस्तों या परिवार का हाथ मिलने पकड़कर बाहर निकल आते है..

फिर शुरू होता है दौर मुफ्त की सलाहों का,

"अरे वो इंसान ही गलत था,तू भरोसा रख तुझे उस से बेहतर मिलेगी/मिलेगा !"

"भाई/बहन तेरी मोहब्बत तो सच्ची थी,बस गलत इंसान से की, इंतजार कर तुझे बो सही इंसान जरूर मिलेगा"

..

हर कोई यही सिखाता है कि हां इस सब से बाहर आने का एक ही रास्ता है...दोबारा किसी और के साथ उसी सब में पड़ जाना..

किंतु हम नादान यह नहीं जानते कि बस किरदार बदलेगा, कहानी वही रहेगी,फिर छोड़ दिए जाओगे तड़पते हुए !!

तो फिर रास्ता क्या है?क्या कोई मोहब्बत सच्ची ही नहीं यहां?

हां है ना, क्यों नहीं, और जवाब इसका सारा जमाना आपको चीख चीख कर दे तो रहा है,,

"यार मेरी मोहब्बत सच्ची थी,साला सामने वाला ही गलत निकला यार !"

जब हमें यकीन है कि मोहब्बत सच्ची है हमारी तो इस मोहब्बत को खुद से क्यों ना करें, खुद्दार क्यों न बने ?!

क्यों किसी का परफेक्ट का इंतजार करना, खुद ही परफेक्ट क्यों न बने,

और यहा परफेक्ट का मतलब यही नहीं कि कान में इयरफोन लगाए "ठुकरा के मेरा प्यार देखेगी" बजाया और भईया चल दिए जिम बॉडी बिल्डर बनने,या दुसरो के लिए अच्छा दिखने के लिए नई नई आदतें अपनाने लगे..

खुद्दार होने का अर्थ है खुद से मोहब्बत करो,जो तुम्हें अच्छा लगे वो करो जमाना तो ख़राब कल भी था आज भी है और रहेगा भी,तुम खुद्दारी सीख लो तो ये खराब दुनिया भी तुम्हें इज्जत देकर बुलाएगी !

और‌ यह तो हम से बेहतर कौन जानता है, जिसने रिश्ते को वक्त देकर कद्र खोई है !

तो सार यही है कि इस दल-दल से बाहर आने के सिर्फ दो रास्ते नहीं,एक तीसरा भी है, " खुद्दारी " जिसके ना साइड इफेक्ट्स है न कोई एक्सपायरी डेट !!🍁🍁

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