कुछ कहना था ! (भाग -1)
जैसा हमेशा मैं कहता हूं कि एक रिश्ता खत्म होने पर, "हम" से टूटकर दो लोग बनते है, एक 'छोड़ने वाला' और दूसरा 'छूटने वाला', छोड़ने वाला थोड़े मजबूत इरादों का होता है तो वह काफी आसानी से रिश्ते को भुला कर अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हो जाता है और छूटने वाला अक्सर वहीं खड़ा रहता है .. और इस जीवन राह में हमें (छूटने वाले) वहीं अटके देख कई राहगीर गुजरते हुए लाखों सलाह देते हैं, कोई ठेके का पता थमा जाता है तो कोई तो भईया कील-हथोड़ी लिए ख़ुद ही बॉब द बिल्डर बन अपना काम धंधा छोड़ वहीं हमें जोड़ने जुट जाता है पूरी शिद्दत से, ((जबकि असलियत में वह खुद की अटेंशन की भूख मिटा रहा होता है,कहते है न कि हर व्यक्ति को चाहिए कि किसी न किसी को उसकी जरूरत हो, तो हमें जोड़ने में जुटे यह लोग और कुछ नहीं वही भूख मिटा रहे है,खैर छोड़िए हम क्यों मुद्दे से भटके,कभी और लिखेंगे इस मुद्दे पर भी..)) हां तो दो प्रकार के राहगीर तो यह हुए जो कि 90% लोगों को मिलते है, किंतु हम लड़कों को एक नई प्रजाति भी मिलती है जो कि 'ठुकरा कर मेरा प्यार,मेरा इंतकाम देखेगी' गाना सुना कर हमें जिम ले जात...